साल 2019 का पहला चंद्रग्रहण आज लोगों को दिखाई दिया. इस बार यह चंद्रग्रहण भारतीय समयानुसार पौष माह की पूर्णिमा तिथि पर 21 जनवरी की सुबह 9 बजकर 4 मिनट से शुरू हुआ और इसका मोक्ष दोपहर 12 बजकर 21 मिनट पर हुआ. वहीं ये भी जानना दिलचस्प होगा कि इस बार इसका नाम सुपर ब्लड वूल्फ मून भी है. ग्रहण के दौरान इस दिन चांद लाल रंग के साथ तांबे के रंग जैसा गहरा नजर आया. इन सबके बीच कई भ्रांतियां व गलत बातें भी फैलती हैं. वहीं चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण इन दोनों ही मौकों पर कई ऐसे काम होते हैं जिन्हें करने की मनाही होती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनके पीछे का वैज्ञानिक आधार क्या है. आइए जानें उसी वैज्ञानिक आधार के बारे में जिसे पढ़ने के बाद आपके सारे वहम एक पल में दूर हो जाएंगे लोग कहते हैं कि चंद्र ग्रहण के समय खाना नहीं खाना चाहिए लेकिन ये बिल्कुल गलत है. आप ग्रहण काल में भी आराम से खाना खा सकते हैं. दरअसल यह मिथ हजारों साल पुराना है जब बिजली नहीं हुआ करती थी और तब सूरज ढलने के बाद लोग अंधेरे में कुछ नहीं करते थे. ग्रहण में खाना न खाने का कोई आधार नहीं है. चंद्रग्रहण के दौरान ये भी सुझाव दिया जाता है कि नाखून न काटें, बाल न काटें या चाकू और छूरी का इस्तेमाल न करें. इन पर भी वही अंधेरे वाली बात लागू होती है जिसका आज के समय में कोई लेना देना नहीं है. दरअसल अंधेरे में इस तरह के काम करने से लोगों का खुद का ही नुकसान होता था. वहीं कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के दिन बच्चों का पैदा होना अच्छा नहीं होता लेकिन आपको बता दें कि फेसबुक शुरू करने वाले मार्क जकरबर्ग चंद्रग्रहण के दिन ही पैदा हुए थे और आज वह दुनिया के सफल लोगों में से एक हैं. इन सब बातों के बावजूद भी लोग वैज्ञानिक तथ्यों को पीछे छोड़ अंधविश्वास से भरी बातों पर भरोसा करते हैं.
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