इस साल भले ही सरकार के पास अंतरिम बजट पेश करने का मौका हो लेकिन वह इस मौके को छोड़ने के मूड में नहीं है. सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्री इस साल इनकम टैक्स की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर सकते हैं. वैसे तो पिछले साल ही इस बात की उम्मीद थी. 2018 में नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट था. लिहाजा जानकारों ने कयास लगाए थे कि टैक्स छूट की सीमा बढ़ सकती है. लेकिन तब वित्त मंत्री ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अभी तक चली आई परंपरा के मुताबिक कभी किसी सरकार ने अंतरिम बजट के दौरान आयकर छूट की सीमा बढ़ाने का फैसला नहीं किया है. चुनाव के बाद नई सरकार किसकी बनेगी. यह सोचकर अभी तक किसी भी सरकार ने अंतरिम बजट के दौरान आयकर सीमा बढ़ाने का फैसला नहीं किया है. ऐसा करने पर नई सरकार पर बोझ सकता है. लिहाजा यह अलिखित कानून की तरह बन गया है. लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार इस परंपरा को तोड़ने की तैयारी में है. लेकिन ऐसी क्या वजह है कि सरकार अब टैक्स छूट की सीमा बढ़ा सकती है. असल में सरकार का पूरा फोकस मतदाताओं को लुभाने की है. ऐसे में सरकार एक जगह फोकस करके सबसे ज्यादा मुनाफा बना सकती है. कॉरपोरेट टैक्स घटाकर सरकार सिर्फ 1 फीसदी मतदाताओं को लुभा सकती है. लेकिन अगर इनकम टैक्स छूट सीमा सरकार घटाती है तो 3 फीसदी मतदाताओं को सीधे लुभा सकती हैं. पॉपुलिस्ट बजट का अनुमान लोकसभा चुनावों में सिर्फ कुछ महीने ही बचे हैं. ऐसे में सरकार इस बार लोकलुभावन बजट लेकर आ सकती है. सरकार की कोशिश रहेगी कि वह हर सेक्शन को राहत देकर मतदाताओं को लुभा सके. क्या हुआ है पहले? 2014-15 में पी चिदंबरम ने लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया था. इस दौरान उन्होंने 'वन रैंक वन पेंशन' का ऐलान किया था. इस ऐलान के जरिए कांग्रेस डिफेंस से जुड़े मतदाताओं को लुभाना चाहते थे. लेकिन इसके बाद हुए चुनावों में बीजेपी की सरकार बनी और वित्त मंत्री का कार्यभार अरुण जेटली ने संभाला था. तब जेटल ने चिदंबरम की आलोचना करते हुए कहा था कि 'वन रैंक वन पेंशन' के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट बहुत कम था. इसके पहले अंतरिम बजट पेश करके हुए कांग्रेस के वित्त मंत्री ने दिलचस्प तरीके से 'हाथ' का जिक्र किया. 1996-97 के अंतरिम बजट में फाइनेंस मिनिस्टर मनमोहन सिंह ने कहा था, 'मिस्टर स्पीकर आज लोकसभा का आखिरी सेशन है. मेरा पूरा भरोसा है कि जब वक्त आएगा हमारे लोग फ्रेंडली हैंड को चुन सकते हैं जिससे देश को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.' कुछ यही अंदाज प्रणब मुखर्जी का भी रहा है. 2009-2010 का अंतरिम बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा था कि मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि जब वक्त आएगा हमारे लोग फ्रेंडली हैंड को चुनेंगे. अब देखना है कि अरुण जेटली इस बार क्या मतदाताओं को इनकम टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर लुभाते हैं या फिर कांग्रेस जैसा दिलचस्प तरीका आजमाते हैं.
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