भारत के पूर्व हाकी कोच हरेंद्र सिंह के लिए ‘हॉकी में कुछ नहीं बचा’ है और अब वह फुटबॉल से जुड़ने की योजना बना रहे हैं क्योंकि वह इस ‘खूबसूरत खेल’ को अपने ‘पहले प्यार’ के काफी समान मानते हैं. विश्व कप में भारत के प्रभावहीन प्रदर्शन के बाद पिछले महीने इस अनुभवी कोच को पुरुष टीम के कोच पद से हटा दिया गया था. उन्हें जूनियर टीम से जुड़ने को कहा गया लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. हरेंद्र ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘हॉकी हमेशा मेरा पहला प्यार रहेगा. मैं आज जो कुछ भी हूं हॉकी के कारण हूं. लेकिन अब मेरे लिये हॉकी में कुछ नहीं बचा है इसलिए मैंने अपनी जानकारी में इजाफा करने का फैसला किया और मेरे दूसरे प्यार फुटबॉल से बेहतर क्या हो सकता है.’ 50 साल के हरेंद्र ने कहा कि वह फुटबाल के बड़े प्रशंसक हैं और स्पेनिश फुटबाल के छोटे पास देने की ‘टिकी टाका’ शैली को काफी पसंद करते हैं. उनका कहना है कि यह शैली भारतीय हॉकी टीम की रणनीति से काफी मिलती जुलती है. उन्होंने कहा, ‘मैं फुटबॉल का बड़ा प्रशंसक हूं मैं आर्सेनल और मैनचेस्टर यूनाईटेड (इंग्लिश प्रीमियर लीग) के प्रदर्शन पर करीबी नजर रखता हूं. स्पेन मेरी पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय टीम है क्योंकि उनकी छोटे पास की शैली भारतीय हॉकी के काफी करीब है.’ जूनियर हॉकी विश्व कप विजेता कोच हरेंद्र पहले ही अपनी नई योजना में मदद के लिए दिल्ली सॉकर संघ के अध्यक्ष शाजी प्रभाकरन से संपर्क कर चुके हैं.
Wednesday, 27 February 2019
तो अब हॉकी की बजाय फुटबॉल की कोचिंग में हाथ आजमाएंगे हरेंद्र ...
भारत के पूर्व हाकी कोच हरेंद्र सिंह के लिए ‘हॉकी में कुछ नहीं बचा’ है और अब वह फुटबॉल से जुड़ने की योजना बना रहे हैं क्योंकि वह इस ‘खूबसूरत खेल’ को अपने ‘पहले प्यार’ के काफी समान मानते हैं. विश्व कप में भारत के प्रभावहीन प्रदर्शन के बाद पिछले महीने इस अनुभवी कोच को पुरुष टीम के कोच पद से हटा दिया गया था. उन्हें जूनियर टीम से जुड़ने को कहा गया लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. हरेंद्र ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘हॉकी हमेशा मेरा पहला प्यार रहेगा. मैं आज जो कुछ भी हूं हॉकी के कारण हूं. लेकिन अब मेरे लिये हॉकी में कुछ नहीं बचा है इसलिए मैंने अपनी जानकारी में इजाफा करने का फैसला किया और मेरे दूसरे प्यार फुटबॉल से बेहतर क्या हो सकता है.’ 50 साल के हरेंद्र ने कहा कि वह फुटबाल के बड़े प्रशंसक हैं और स्पेनिश फुटबाल के छोटे पास देने की ‘टिकी टाका’ शैली को काफी पसंद करते हैं. उनका कहना है कि यह शैली भारतीय हॉकी टीम की रणनीति से काफी मिलती जुलती है. उन्होंने कहा, ‘मैं फुटबॉल का बड़ा प्रशंसक हूं मैं आर्सेनल और मैनचेस्टर यूनाईटेड (इंग्लिश प्रीमियर लीग) के प्रदर्शन पर करीबी नजर रखता हूं. स्पेन मेरी पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय टीम है क्योंकि उनकी छोटे पास की शैली भारतीय हॉकी के काफी करीब है.’ जूनियर हॉकी विश्व कप विजेता कोच हरेंद्र पहले ही अपनी नई योजना में मदद के लिए दिल्ली सॉकर संघ के अध्यक्ष शाजी प्रभाकरन से संपर्क कर चुके हैं.
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