काकोरी कांड तो आपको याद ही होगा जिसमें ट्रेन लूटने के बाद कई क्रांतिकारी पकड़े गए थे. इस कांड की वजह से 19 दिसंबर 1927 को आजादी के तीन नायक पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाकुल्लाह खान को फांसी दी गई थी. इस घटना के 70 साल बाद यानी 19 दिसम्बर 1997 को दूरदर्शन चैनल पर एक बड़ा खुलासा हुआ था. दूरदर्शन ने एक डॉक्यूमेंट्री के सिलसिले में एक क्रांतिकारी का इंटरव्यू किया था जो काकोरी कांड में शामिल था. इस क्रांतिकारी ने इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि अगर वो उस वक्त गोली नहीं चलाता तो बिस्मिल और अशफाकुल्लाह पकड़े नहीं जाते. इस क्रांतिकारी का नाम मन्मथनाथ गुप्त था. जो बाद में लेखक बन गए. आज मन्मथनाथ गुप्त की जयंती है. मन्मथनाथ गुप्त से काकोरी कांड के दौरान गोली चल गई थी लेकिन उन्हें फांसी की सजा नहीं मिली क्योंकि उनकी उम्र कम थी. उन्हें 14 साल जेल की सजा दी गई थी. 1937 में वह रिहा भी हुए लेकिन वह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखते रहते थे इसलिए उन्हें 9 साल के लिए फिर जेल भेज दिया गया. मन्मथ नाथ गुप्त के बारे में कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों को एचआरए (हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियेशन) में वह ही लेकर आए थे. जिसे आजाद ने भगत सिंह और बाकी साथियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाया. मन्मथ नाथ गुप्त ने अपनी बायोग्राफी में एक हैरान कर देने वाला किस्से का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि एक बार चंद्रशेखर आजाद ने उन पर खाली पिस्टल तान दी. आजाद उनके साथ मजाक कर रहे थे लेकिन पिस्टल में गोली थी और वह गुप्त के पास से होकर निकल गई. इस घटना के बाद चारों तरफ सन्नाटा फैल गया था और आजाद को इस वाकये के बाद बहुत अपराधबोध हुआ था. ये भी पढ़ें: जन्मदिन विशेष: सत्यजीत रे ने क्यों कह दिया था- अपने काम से कभी खुश नहीं होंगे बिरजू महाराज ये भी पढ़ें: सच मानिए, मुहब्बत के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है
Thursday, 7 February 2019
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