माउंट एवरेस्ट पर उत्तर की ओर से जाने का प्रयास करने वाले पर्वतारोहियों की संख्या में चीन इस साल एक तिहाई तक की कटौती करेगा. विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर एक बड़े सफाई अभियान की योजना के तहत यह कदम उठाया जा रहा है. चीन की सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी. खबरों के मुताबिक 8,850 मीटर (29,035 फुट) ऊंची चोटी पर उत्तर की ओर से चढ़ने वाले पर्वतारोहियों की संख्या 300 से कम रखी जाएगी और पर्वतारोहण का मौसम भी अब वसंत ऋतु तक ही सीमित रहेगा. उन्होंने बताया कि सफाई कोशिशों के तहत उन लोगों के शव भी बरामद करना शामिल है, जिनकी मौतें 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हुई थी. एवरेस्ट चीन और नेपाल में पड़ता है. प्रत्येक साल हिमालय पर्वत के चीन में स्थित उत्तरी हिस्से पर करीब 60,000 पर्वतारोही और गाइड जाते हैं. चीन ने पर्वत पर मौजूद डिब्बे, प्लास्टिक के थैले, स्टोव उपकरण, तंबू और ऑक्सीजन टैंक सहित अन्य प्रकार के कूड़ा को जमा करने और उसका पुनर्चक्रण करने के लिए केंद्र बनाए हैं. बता दें कि एवरेस्ट फतह करने की कोशिश में सालाना कई लोगों की जानें जाती हैं. ज्यादातर मौतें 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर ‘डेथ जोन’ में होती है क्योंकि वहां मानव जीवन के लिए अनुकूल वायु नहीं होती है. हिमालयन डेटाबेस के अनुसार 2017 में 648 लोगों ने पर्वतारोहण किया था, जिसमें से 202 लोगों ने उत्तर की ओर से पर्वतारोहण किया था. इन लोगों में छह लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई थी.
Tuesday, 22 January 2019
एवरेस्ट पर जाने वाले पर्वतारोहियों की संख्या में कटौती करेगा चीन
माउंट एवरेस्ट पर उत्तर की ओर से जाने का प्रयास करने वाले पर्वतारोहियों की संख्या में चीन इस साल एक तिहाई तक की कटौती करेगा. विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर एक बड़े सफाई अभियान की योजना के तहत यह कदम उठाया जा रहा है. चीन की सरकारी मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी. खबरों के मुताबिक 8,850 मीटर (29,035 फुट) ऊंची चोटी पर उत्तर की ओर से चढ़ने वाले पर्वतारोहियों की संख्या 300 से कम रखी जाएगी और पर्वतारोहण का मौसम भी अब वसंत ऋतु तक ही सीमित रहेगा. उन्होंने बताया कि सफाई कोशिशों के तहत उन लोगों के शव भी बरामद करना शामिल है, जिनकी मौतें 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हुई थी. एवरेस्ट चीन और नेपाल में पड़ता है. प्रत्येक साल हिमालय पर्वत के चीन में स्थित उत्तरी हिस्से पर करीब 60,000 पर्वतारोही और गाइड जाते हैं. चीन ने पर्वत पर मौजूद डिब्बे, प्लास्टिक के थैले, स्टोव उपकरण, तंबू और ऑक्सीजन टैंक सहित अन्य प्रकार के कूड़ा को जमा करने और उसका पुनर्चक्रण करने के लिए केंद्र बनाए हैं. बता दें कि एवरेस्ट फतह करने की कोशिश में सालाना कई लोगों की जानें जाती हैं. ज्यादातर मौतें 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर ‘डेथ जोन’ में होती है क्योंकि वहां मानव जीवन के लिए अनुकूल वायु नहीं होती है. हिमालयन डेटाबेस के अनुसार 2017 में 648 लोगों ने पर्वतारोहण किया था, जिसमें से 202 लोगों ने उत्तर की ओर से पर्वतारोहण किया था. इन लोगों में छह लोगों की मौत होने की पुष्टि हुई थी.
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