चांद पर भेजे गए चीन के रोवर पर कपास के बीज के अंकुरित होने के बाद पहली बार हमारी दुनिया से बाहर चांद पर कोई पौधा पनप रहा है. वैज्ञानिकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. चोंगकिंग विश्वविद्यालय के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट से जारी तस्वीरों की श्रृंखला के मुताबिक, Chang’e 4 के इस महीने चंद्रमा पर उतरने के बाद यह अंकुर एक कनस्तर के भीतर मौजूद जालीनुमा ढांचे से पनपा है. प्रयोग के डिजाइन की अगुवाई करने वाले शाइ गेंगशिन ने कहा, 'यह पहला मौका है जब इनसान ने चंद्रमा की सतह पर जीवविज्ञान में पौधे के विकास के लिए प्रयोग किए.' अंतरिक्ष के क्षेत्र में महाशक्ति बनने की चीन की महत्वाकांक्षा बढ़ाते हुए Chang’e 4 तीन जनवरी को चंद्रमा के सबसे दूर के हिस्से में उतरा और प्राकृतिक उपग्रह के कभी न देखे गए हिस्से तक पहुंचने वाला विश्व का पहला अंतरिक्षयान बन गया. चोंगकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वायु, जल और मिट्टी युक्त 18 सेंटीमीटर का एक बाल्टीनुमा डिब्बा भेजा था. इसके भीतर कपास, आलू एवं सरसों प्रजाति के एक एक पौधे के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाई के अंडे एवं ईस्ट भेजे गए. विश्वविद्यालय ने बताया कि अंतरिक्षयान से भेजी गई तस्वीरों में देखा गया कि कपास के अंकुर बढ़िया से विकसित हो रहे हैं. लेकिन अब तक अन्य पौधों के बीजों के अंकुरित होने की खबर नहीं है.
Wednesday, 16 January 2019
चांद पर पौधा उगाने वाला पहला देश बना चीन, पढ़ें कैसे हुआ ये सब
चांद पर भेजे गए चीन के रोवर पर कपास के बीज के अंकुरित होने के बाद पहली बार हमारी दुनिया से बाहर चांद पर कोई पौधा पनप रहा है. वैज्ञानिकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. चोंगकिंग विश्वविद्यालय के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट से जारी तस्वीरों की श्रृंखला के मुताबिक, Chang’e 4 के इस महीने चंद्रमा पर उतरने के बाद यह अंकुर एक कनस्तर के भीतर मौजूद जालीनुमा ढांचे से पनपा है. प्रयोग के डिजाइन की अगुवाई करने वाले शाइ गेंगशिन ने कहा, 'यह पहला मौका है जब इनसान ने चंद्रमा की सतह पर जीवविज्ञान में पौधे के विकास के लिए प्रयोग किए.' अंतरिक्ष के क्षेत्र में महाशक्ति बनने की चीन की महत्वाकांक्षा बढ़ाते हुए Chang’e 4 तीन जनवरी को चंद्रमा के सबसे दूर के हिस्से में उतरा और प्राकृतिक उपग्रह के कभी न देखे गए हिस्से तक पहुंचने वाला विश्व का पहला अंतरिक्षयान बन गया. चोंगकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वायु, जल और मिट्टी युक्त 18 सेंटीमीटर का एक बाल्टीनुमा डिब्बा भेजा था. इसके भीतर कपास, आलू एवं सरसों प्रजाति के एक एक पौधे के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाई के अंडे एवं ईस्ट भेजे गए. विश्वविद्यालय ने बताया कि अंतरिक्षयान से भेजी गई तस्वीरों में देखा गया कि कपास के अंकुर बढ़िया से विकसित हो रहे हैं. लेकिन अब तक अन्य पौधों के बीजों के अंकुरित होने की खबर नहीं है.
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